Creation plan of God | ख़ुदा का तख़्लीक़ी मंसूबा

 

AL-RISALA (Urdu) | Sept-2019

अल्लाह तआला ने एक बेहतरीन दुनिया बनाई। हर लिहाज़ से यह एक बिल्कुल परफ़ेक्ट दुनिया थी। अल्लाह तआला ने यह तय किया कि इस उच्च स्तर की बेहतरीन दुनिया में ऐसे लोग बसाए जाएँ जो हर पहलू से बेहतरीन इंसान हों।

इसी मक़सद के लिए अल्लाह तआला ने इंसान को पैदा किया, उसे धरती पर आबाद किया और उसे पूरी आज़ादी दी।

 

यह दुनिया इस योजना के लिए एक सेलेक्शन ग्राउंड की हैसियत रखती है।  यहाँ यह परखा जा रहा है कि कौन इंसान अपनी आज़ादी का सही इस्तेमाल करता है और कौन इसका ग़लत इस्तेमाल करता है।

इतिहास (पृथ्वी पर मानव जीवन का समय) के ख़ातमे पर यह फ़ैसला होगा कि आज़ादी का ग़लत इस्तेमाल करने वाले लोग रिजेक्ट कर दिए जाएँगे, और जिन्होंने अपनी आज़ादी का सही इस्तेमाल किया, उनको चुन कर जन्नत में आबाद कर दिया जाएगा।


 

जन्नत की अवधारणा को कुछ लोग इंसानी ख़्वाहिशों की ख़ूबसूरत नज़रिया-साज़ी  (beautiful idealization of human wishes) का नाम देते हैं। लेकिन ज़्यादा सही यह है कि जन्नत की अवधारणा को इंसानी इतिहास की ख़ूबसूरत ताबीर [व्याख्या] (beautiful interpretation of human history) कहा जाए।

 

अस्तित्व में लाने (सृजन) की योजना [Creation Plan]

 

ख़ुदा के इस तख़्लीक़ी मंसूबे (Creation Plan) की शुरुआत का ज़िक्र क़ुरआन की सूरह अल-बक़रह में आया है। इन आयात का अनुवाद यह है:


और जब तेरे रब ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं ज़मीन में एक ख़लीफ़ा बनाने वाला हूं।


फ़रिश्तों ने कहा: क्या तू ज़मीन में ऐसे लोगों को बसाएगा जो इसमें फ़साद करें और ख़ून बहाऐं। और हम तेरी हम्द (स्तुति, गुणगान) करते हैं और तेरी पाकी बयान करते हैं।


अल्लाह ने कहा मैं जानता हूं जो तुम नहीं जानते।


और अल्लाह ने सिखा दिए आदम को सारे नाम, फिर उन्हें फ़रिश्तों के सामने पेश किया और कहा कि अगर तुम सच्चे हो तो मुझे इन लोगों के नाम बताओ।


फ़रिश्तों ने कहा कि तू पाक है। हम तो वही जानते हैं जो तूने हमें बताया। बेशक तू ही इल्म वाला और हिकमत (तत्वदर्शिता) वाला है।

(क़ुरआन, सूरह अल-बक़रह: 2:30–32)

 

असल बात यह है कि फ़रिश्ते पूरे इंसानी समूह को देख कर अपनी राय बना रहे थे।

अल्लाह ने एक अमली नमूने (प्रैक्टिकल डेमो) से यह स्पष्ट कर दिया कि सृजन Creation Plan का लक्ष्य पूरा इंसानी समूह नहीं, बल्कि हर दौर में पैदा होने वाले अलग-अलग इंसान हैं। हालांकि समूह के स्तर पर बिगाड़ आएगा, लेकिन व्यक्तियों के स्तर पर हमेशा अच्छे लोग वुजूद में आते रहेंगे। 

 

अल्लाह के Creation Plan के मुताबिक, यह दुनिया एक इम्तिहान का मैदान (selection ground) है — यानी पूरी इंसानी आबादी में से उन बेहतरीन इंसानों को चुनना जो परफ़ेक्ट दुनिया में बसाए जाने के लायक़ हों। 

 

सृजन (तख़्लीक़) का लक्ष्य यह नहीं है कि इंसान इसी धरती पर मे'यारी निज़ाम (ideal system) क़ायम करे, बल्कि तख़लीक़ (Creation) का निशाना यह है कि हर दौर और हर पीढ़ी में से उन इंसानों को चुना जाए, जो पूरी आज़ादी के बावजूद अपने आप को, अपनी मर्ज़ी से, अल्लाह के बनाए क़ानून और उसूलों का पाबंद (अनुशासित) बना लें।

 


बेहतरीन इंसानों का चुनाव


अल्लाह के तख़्लीकी मंसूबे (Creation Plan) के मुताबिक, ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता; ईश्वर) ने मौजूदा दुनिया को इसलिए नहीं बनाया कि यहाँ समूह के स्तर पर कोई मे'यारी निज़ाम (ideal system) बनाया जाए।

असल हक़ीक़त यह है कि यह दुनिया इम्तेहान के लिए बनाई गई है।

 

यहाँ हर इंसान को पूरी आज़ादी दी गई है — वह चाहे तो नेक (सुधारक) बनकर रहे, या बिगाड़ फैलाने वाला बनकर। यही वजह है कि इस दुनिया में कभी भी समूह के स्तर पर कोई मे'यारी निज़ाम (आदर्श व्यवस्था) नहीं बन सकती। मे'यारी निज़ाम (ideal system) की जगह सिर्फ़ जन्नत है — और वह जन्नत में ही बनेगा।  

 

मौजूदा दुनिया दरअस्ल बेहतरीन इंसानों को चुनने का मैदान है। यहाँ हर पीढ़ी (generation) से बेहतरीन लोगों को चुना जा रहा है।

मिसाल के तौर पर, आदम की पहली पीढ़ी में क़ाबिल(Cain) को रद्द कर दिया गया, जबकि हाबिल(Abel) को क़बूल किया (चुना) गया। यही सिलसिला पूरी इंसानी तारीख़ (इतिहास) में पूरी तरह जारी है— हर दौर में और हर पीढ़ी में अल्लाह योग्य लोगों को चुन रहा है और अयोग्य लोगों को रद्द कर रहा है।

 

रद्द व क़ुबूल (चुनाव प्रक्रिया) के इसी मामले को क़ुरआन में इन अल्फ़ाज़ में बताया गया है:


सुल्लतुन मिनल-अव्वलीन


व सुल्लतुन मिनल-आख़िरीन 

 

(56:39-40)


यानी - अगलों में से एक बड़ा गिरोह, और पिछलों में से भी एक बड़ा गिरोह।

 

जब क़ाबिल-ए-क़बूल और क़ाबिल-ए-रद्द (योग्य और अयोग्य) इंसानों की तय सूची पूरी हो जाएगी, तो उसके बाद ख़ालिक़-ए-कायनात (सृष्टिकर्ता; ईश्वर) इस मौजूदा दुनिया को ख़त्म करके एक और दुनिया को क़रीब लाएगा (क़ुरआन, 50:31 | 26:90 | 3:133) — वह बेहतरीन और आदर्श (ideal) दुनिया, जिसे जन्नत कहा जाता है।


क़ाबिल-ए-क़बूल (इम्तेहान में सफल) लोग इस जन्नत में बसा दिए जाएँगे, जहाँ वे हमेशा-हमेशा के लिए डर और ग़म से मुक्त शांतिपूर्ण ज़िंदगी गुज़ारेंगे। 

इसके विपरीत, जो लोग अयोग्य ठहराए गए, उन्हें रद्द करके कायनात के कूड़े-ख़ाने में डाल दिया जाएगा, जहाँ वह हमेशा-हमेशा के लिए पछतावा भरी ज़िंदगी गुज़ारेंगे।


 

अल्लाह इंसान से क्या चाहता है ?


क़ुरआन में बताया गया है कि इंसान को अहसन-ए-तक़वीम की सूरत में (सबसे बेहतरीन संरचना और क्षमताओं के साथ) पैदा किया गया है। 


साथ ही यह भी फ़रमाया गया कि इंसान को अस्फ़ल-ए-साफ़िलीन की हालत (सबसे नीची हालत) में डाल दिया गया है 


(सूरह अत-तीन, 95:4-5)


यह बात शाब्दिक (literal) अर्थ में नहीं हो सकती, क्योंकि ख़ुद क़ुरआन से साबित होता है कि मौजूदा दुनिया इंसान के लिए जन्नत की दुनिया से मिलती-जुलती दुनिया है ।

(सूरह अल-बक़रह, 2:25)

 

इससे मालूम होता है कि इस दुनिया की ज़िंदगी भौतिक (material) अर्थों में अस्फ़ल (नीची) नहीं है, बल्कि वह नफ़्सियाती (मानसिक) अर्थों में एहसास-ए-महरूमी (अधूरापन और कमी का एहसास) की ज़िंदगी है।

 

ऐसा इसलिए है, क्योंकि इंसान को बहुत ऊँचा ज़ौक़ (high taste) के साथ पैदा किया गया है। यही वजह है कि मौजूदा दुनिया की भौतिक सुख-सुविधाएँ (material blessings) इंसान को फुलफ़िलमेंट (fulfillment) के दर्जे में पूर्ण संतुष्टि नहीं दे पातीं। चाहे इंसान को सांसारिक नेअमतें कितनी ही ज़्यादा हासिल हो जाएँ।

 

मिसाल के तौर पर अमेरिका के बिल गेट्स (Bill Gates) के लिए उसकी दौलत संतोष का ज़रिया नहीं बनी। इसलिए उन्होंने अपनी दौलत का बड़ा हिस्सा चैरिटी में दे दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को व्हाइट हाउस में पहुँच कर सुकून नहीं मिलाइसलिए उन्होंने व्हाइट हाउस को कोकून (एक तरह का पिंजरा) बताया।

 

इस मामले पर ग़ौर करने से मालूम होता है कि इंसान से यह चाहा गया है कि वह मौजूदा दुनिया को जन्नत से मिलती-जुलती दुनिया के तौर पर दरयाफ़्त करे (देखे और समझे) । दुनिया की जन्नत असल जन्नत नहीं है, बल्कि यह आख़िरत (परलोक) की जन्नत का शुरुआती तआरुफ़ (परिचय) है।

 

इंसान को चाहिए कि वह दुनिया की नेमतों (blessings) को देख कर आख़िरत (परलोक) की जन्नत को दरयाफ़्त (discover) करे । उसके अंदर शुक्र का जज़्बा (कृतज्ञता की भावना) पैदा हो, और वह अल्लाह के वादे -

"ल-इन शकर्तुम ल-अज़ीदन्नाकुम" (क़ुरआन, सूरह इब्राहीम 14:7) के मुताबिक़ आख़िरत की जन्नत का मुस्तहिक़ (योग्य) बने,

यानी: अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें ज़्यादा दूँगा।


Source : AL-RISALA (Urdu) | Sept-2019


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