कारणों का पर्दा
Source : AL-RISALA (Urdu) | MAY - 2011
अल्लाह के वजूद (अस्तित्व) पर ज़िंदा यक़ीन इंसान के लिए सबसे ज़्यादा
ज़रूरी चीज़ है, लेकिन अनुभव बताता है कि ज़्यादातर लोग अल्लाह
के वजूद पर ज़िंदा यक़ीन नहीं बना पाते।
कुछ तो यहाँ तक पहुँच जाते हैं कि वे अल्लाह
के वजूद का ही इनकार करने लगते हैं। यह कोई आज की नई बात नहीं है, बल्कि
इंसान के इतिहास में हमेशा से ऐसा होता आया है।
ऐसा क्यों होता है?
यह इसलिए होता है क्योंकि इस दुनिया का पूरा सिस्टम अल्लाह की बनाई हुई योजना (Creation Plan) के अनुसार चलता है। यहाँ हर चीज़ किसी न किसी वजह (Cause and Effect) से सामने आती है।
जो भी घटना हमारे सामने
होती है, उसके पीछे हमें कोई ज़ाहिरी (सामने दिखने वाली) वजह नज़र आती है। लोग उसी बाहरी वजह को पकड़
लेते हैं और उसके पीछे छुपी असली हक़ीक़त तक नहीं पहुँच पाते। यही वजह है कि
ज़्यादातर लोग किसी भी घटना को अल्लाह से जोड़कर देखने से महरूम (वंचित) रह जाते हैं।
यह मामला हमेशा से इतिहास में मौजूद रहा है, लेकिन आज
के दौर में साइंटिफिक खोजों के बाद इसने एक बाक़ायदा नज़रिया की शक्ल ले ली है, जिसे Law of Causation कहा जाता है।
जब साइंटिफिक तहक़ीक़ात (जाँच-पड़ताल) ने टेलीस्कोप और माइक्रोस्कोप की मदद से
कायनात में होने वाली घटनाओं के पीछे प्राकृतिक कारणों को खोज निकाला, तो लोगों
ने यह समझ लिया कि दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, वह सिर्फ़
प्राकृतिक कारणों के तहत हो रहा है। साइंटिफिक खोजों के हवाले से यह बात कही जाने
लगी कि — “अगर घटनाएँ प्राकृतिक कारणों (फ़ितरी असबाब) से हो रही है, तो फिर वह
किसी अलौकिक कारण (supernatural causes) के तहत नहीं हो सकती”:
If events are due to natural causes,
they are not due to supernatural causes.
यही मौजूदा दुनिया में इंसान का इम्तिहान है।
इंसान को चाहिए कि वह अपनी सोच और चेतना (शऊर) को इतना ज़्यादा विकसित बनाए कि वह सामने दिखने वाले (ज़ाहिरी) कारणों के पीछे असली रचयिता (ख़ालिक़) का काम देख सके। वह यह डिस्कवर कर सके कि इस
मामले में जो कारण हमें नज़र आता है, वह सिर्फ़ एक पर्दा हैं, न कि अस्ल
हक़ीक़त (वास्तविकता)।
इसी डिस्कवरी का नाम ईमान है, और इस
दुनिया में जो लोग इस डिस्कवरी (खोज) का सबूत
दें, वही अल्लाह के नज़दीक इस क़ाबिल ठहरेंगे कि उनको इनाम के
तौर पर हमेशा-हमेशा की जन्नत में दाख़िल किया जाए।
