हबल अल्लाह, हबल अन-नास


हबल अल्लाह 

हबल अन-नास


Source : AL-RISALA (Urdu) | June -2009


क़ुरआन में यहूद के बारे में अल्लाह ने कहा है:

(तर्जुमा): और उन पर मुसल्लत कर दी गई ज़िल्लत चाहे वे कहीं भी पाए जाऐं, सिवा इसके कि अल्लाह की तरफ़ से कोई अहद (वचन) हो या लोगों की तरफ़ से कोई अहद……(आल-ए-इमरान: 112)

 

क़ुरआन की इस आयत में जिस मामले का ज़िक्र है, वह कोई रहस्यमय (mysterious) या समझ से बाहर मामला नहीं है, और न इसका ताल्लुक़ सिर्फ़ यहूद से है।

इसका ताल्लुक़ मुसलमानों से भी तना ही है जितना कि यहूद से।

 

यह आयत असल में यहूद के ज़रिए फ़ितरत के एक क़ानून को समझाती है। 

वो क़ानून ये है कि किसी अहले-किताब गिरोह (believers in revealed books) के अंदर अगर दीन की सही रूह ज़िंदा हो, तो वह अल्लाह की किताब से अपनी ज़िंदगी के लिए रहनुमाई हासिल करेगा और अपने मसलों का हल अल्लाह की किताब से तलाश करेगा। 

लेकिन जब उसके अंदर दीन की सही रूह बाक़ी न रहे, तो ऐसा गिरोह इंसानों के क़ायम किए हुए निज़ाम (सिस्टम) में अपने मसलों का हल तलाश करेगा 

यह बात आज के मुसलमानों पर बिल्कुल फिट बैठती है।


आजकल हिंदुस्तान के लगभग हर शहर में मुसलमानों के जलसे (सभाएं) हो रहे हैं, जहाँ मुसलमानों के रहनुमा अख़बारी बयान दे रहे हैं। 

इन जलसों और तक़रीरों में बार-बार यही कहा जाता है कि हमें लोकतांत्रिक अधिकार (जमहूरी हुक़ूक़) नहीं दिए जा रहे हैं और संविधान के मुताबिक़, नागरिकों के लिए जो लोकतांत्रिक अधिकार हैं, वो हमें भी दिए जाएं।   

लेकिन यह तरीक़ा असल में "हब्लिन-मिनन्नास"— यानी इंसानों के बनाए हुए सिस्टम (निज़ाम) के रिये अपने मसलों का हल ढूंढना है।  




अगर उन लोगों के अंदर दीन की सही स्परिट (रूह) ज़िंदा होती, तो वे मुसलमानों को क़ुरआन की आयत "अल-माइदा :67" की याद दिलाते 

वे बताते कि क़ुरआन के मुताबिक़, तुम्हारे लिए इज़्ज़त और तहफ़्फ़ुज़ (सुरक्षा) की ज़िंदगी हासिल करने का असली राज़ इसी में है कि तुम अल्लाह की नाज़िल की हुई सच्चाई —यानी क़ुरआन—को लोगों तक पहुँचाओ। 

क्योंकि क़ुरआन की इस आयत (5:67) में साफ़ तौर पर बताया गया है कि लोगों से महफ़ूज़ रहने का राज़ balligh maa unzila ilayka min Rabbika के अमल के अंदर छिपा है।

यानी - जो कुछ तुम्हारे ऊपर तुम्हारे रब की तरफ़ से उतारा गया है, उसे पहुँचा दो

 

अल्लाह के नज़दीक पसंद की जाने वाली क़ौम वही है जो अपनी ज़िंदगी की रहनुमाई अल्लाह की किताब से लेती है।

और अल्लाह के नज़दीक नापसंद क़ौम वह है जो अल्लाह की किताब के अलावा कहीं और से अपने लिए रहनुमाई तलाश करने लगे। 


हबल अल्लाह अल्लाह की रस्सी  

हबल अन-नास   लोगों की रस्सी


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