तदब्बुर-ए-क़ुरआन
Source : AL-RISALA (Urdu) |MARCH - 2011
क़ुरआन
की सूरह साद में बताया गया है :
यह क़ुरआन एक बा-बरकत किताब है जो हमने तुम्हारी तरफ़ उतारी है, ताकि लोग इसकी आयतों पर ग़ौर करें और ताकि अक़्ल वाले इससे नसीहत हासिल करें। (38:29)
किताबुन अनज़लनाहु इलइका मुबारकुन लियद्दब्बरू आयातिही व-लियतज़क्क़रा उलू अल-अलबाब (38: 29)
इस
आयत में "तदब्बुर" का मतलब "तफ़क्कुर"
है।
"तफ़क्कुर" क्या है ?
तफ़क्कुर दरअस्ल अपनी अक़्ल को इस्तेमाल करने का दूसरा नाम है।
इसका मतलब यह है कि क़ुरआन को पढ़ते हुए अपनी अक़्ल को खुला रखो, अपने दिमाग़ पर ज़ोर डालो और सोचो कि आख़िर कहा क्या जा रहा है। क्योंकि अक़्ली ग़ौर-ओ-फ़िक्र (ठहरकर गहराई से सोचने-समझने) के ज़रिये ही इंसान को क़ुरआन से वह अहम नसीहत (सीख) मिलती है जो उसके दिल और सोच को बदल दे— न कि सिर्फ़ उसके अलफ़ाज़ (शब्दों) पढ़ लेने से ।
इसका तरीक़ा यह है कि आदमी जब क़ुरआन की तिलावत करे तो उस
वक़्त वह अपनी अक़्ल को इस्तेमाल करते हुए उसकी तिलावत करे। इसी तरह, जब वह नमाज़ में
क़ुरआन का कोई हिस्सा पढ़े तो वहाँ भी वह अपनी अक़्ल और
फ़हम (समझ) को खुला रखते हुए क़ुरआन की तिलावत करे।
कोई शख़्स जब इस तरह क़ुरआन की तिलावत करेगा तो बार-बार ऐसा
होगा कि क़ुरआन की कोई आयत या क़ुरआन का कोई लफ़्ज़ उसकी अक़्ल को स्ट्राइक करेगा।
ऐसे मौक़े पर आदमी को चाहिए कि वह ठहरकर उस पर गहराई
से ग़ौर करे। इस तरह उसे क़ुरआन से नसीहत (सीख)
की ग़िज़ा मिलती रहेगी।
मिसाल के तौर पर क़ुरआन को पढ़ते हुए यह आयत आपके सामने आई:
"पस अल्लाह उन्हें इस क़ौल के बदले में ऐसे बाग़ देगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी"
"फ़-असाबहुमु अल्लाहु बिमा क़ालू,
जन्नातिन तजरी मिन तहतिहा अल-अन्हारु"
(सूरह अल-मायदा 5:85)
इस
आयत को पढ़ते हुए आपको यह हदीस याद आई:
“जो कहे ला इला-ह इल्लल्लाह, वह जन्नत में दाख़िल होगा।”
(तबरानी, रक़्मुल-हदीस: 2447)
इसके बाद आप ने ठहरकर सोचा कि इन दोनों में समानता क्या है ?
फिर ग़ौर करने के बाद आपकी
समझ में आएगा कि हदीस में जिस “क़ौल” (जिस बात
को कहने) का
ज़िक्र आया है, उसकी तशरीह (व्याख्या)
क़ुरआन से होती है, यानी
हदीस में जिस क़ौल पर जन्नत का वादा किया गया है, उससे मुराद क़ौल-ए-मा'रिफ़त (अल्लाह की पहचान की बात) है, न कि महज़ लफ़्ज़ी क़ौल (कलिमा)।
यही
वह चीज़ है जिसे तदब्बुर और तफ़क्कुर
(ठहरकर गहराई से सोच-विचार)
कहा गया है।
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