अल्लाह से मोहब्बत

अल्लाह से मोहब्बत        


Source : AL-RISALA  (Urdu) | MAR - 2011


क़ुरआन की सूरह अल-बक़रह में बताया गया है कि अल्लाह पर ईमान लाने वाले, अल्लाह से शदीद (बहुत ज़्यादा) मोहब्बत रखते हैं । (2:165)

अब सवाल यह है कि इस आयत में अल्लाह से मोहब्बत का मतलब क्या है?

 

सूफ़ी तबका इसे इश्क-ए-इलाही, यानी अल्लाह से इश्क के अर्थ में लेते हैं।

उलमा (आलिम तबका) आमतौर पर यह मानते हैं कि अल्लाह से मोहब्बत का मतलब है अल्लाह के हुक्मों का पालन (इताअत) करना।   

लेकिन इन दोनों तफ़सीरों में मोहब्बत का अस्ल मफ़हूम सामने नहीं आता।

 

मोहब्बत दरअसल किसी के साथ दिल का बहुत गहरा रुजहान (तवज्जोह) का नाम है, यानी: 

Strong affection, deep emotional attachment. 

अल्लाह के साथ यह गहरा दिली लगाव उस इंसान के अंदर पैदा होता है, जो अल्लाह की बड़ी-बड़ी नेमतों और इनामों को, पूरी समझ और जागरूक एहसास के साथ दरयाफ़त करे (पहचाने)

अल्लाह ने इंसान को पैदा किया जबकि उसका कोई वजूद न था (क़ुरआन 19:9)। 


अल्लाह ने इंसान को बेहतरीन सूरत अता की (क़ुरआन 40:64), हदीस में आता है कि अल्लाह ने इंसान को अपनी सूरत पर बनाया।


इंसान को अल्लाह ने रहने के लिए ज़मीन दी, जहाँ असाधारण रूप से उसकी ज़रूरत की तमाम चीज़ें मौजूद थीं। 


इंसान के लिए अल्लाह ने जन्नत की सूरत में एक मे'यारी दुनिया (perfect world) बनाई, जहाँ उसे पूरा फ़ुलफ़िलमेंट हासिल हो। 


अल्लाह ने इंसान को अक़्ल दी । हदीस के मुताबिक़, अल्लाह की पैदा की हुई तमाम चीज़ों (मख़्लूक़ात) में अक़्ल सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाली और बुलंद दर्जे की चीज़ है


अल्लाह ने इंसानों के अंदर असाधारण रूप से मवद्दत (selfless love) पैदा की जिसकी वजह से परिवार और समाज जैसी चीज़ें वजूद में आती हैं । (क़ुरआन 30:21)


और इन सबके अलावा यह कि अल्लाह ने इंसान को दूसरों से अलग, असाधारण समझ-बूझ (शऊर) दिया, जिससे वह उसके इनामों (उपकारों) को जाने। 


इसके साथ ही अल्लाह ने इंसान को दूसरों से अलग, असाधारण तौर पर लज़्ज़त महसूस करने की सलाहियत (sense of pleasure) दी, जिससे वह उसकी नेमतों से भरपूर लुत्फ़ (आनंद) उठा सके।



इस तरह की बे-शुमार (countless) नेमतें हैं जो अल्लाह ने इंसान को अता किए हैं। 


जब आदमी इन अनगिनत इनामों (उपकारों) पर ग़ौर करता है, ठहरकर सोचता है, तो उसके अंदर वही कैफ़ियत (अहसास) पैदा होती है जिसे क़ुरआन (2:165) में "हुब्ब-ए-शदीद"(शदीद मोहब्बतके अल्फ़ाज़ में बयान किया गया है।




(क़ुरआन 19:9) :

जवाब मिला कि ऐसा ही होगा। तेरा रब फ़रमाता है कि यह मेरे लिए आसान है। मैंने इससे पहले तुम्हें पैदा किया, हालांकि तुम कुछ भी न थे। 

(क़ुरआन 30:21) :

और उसकी निशानियों में से यह है कि उसने तुम्हारी जिन्स से तुम्हारे लिए जोड़े पैदा किए ताकि तुम उनसे सुकून हासिल करो। और उसने तुम्हारे दर्मियान मुहब्बत और रहमत रख दी। बेशक इसमें बहुत सी निशानियां हैं उन लोगों के लिए जो ग़ौर करते हैं। 

(क़ुरआन 40:64) :

अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ठहरने की जगह बनाया और आसमान को छत बनाया और तुम्हारा नक़्शा बनाया पस उम्दा नक़्शा बनाया। और उसने तुम्हें उम्दा चीज़ों का रिज़्क़ दिया। यह अल्लाह है तुम्हारा रब, पस बड़ा ही बाबरकत है अल्लाह जो रब है सारे जहान का।



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