क़ुरआन—फ़ातेह-ए-'आलम
Source : AL-RISALA (Urdu) | MAR - 2011
दूसरे ख़लीफ़ा (The second caliph) उमर फ़ारूक़ (रज़ि०) का कहना है कि अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया:
अल्लाह इस क़ुरआन के ज़रिये एक क़ौम को उठाता है और उसी के ज़रिये वह दूसरी क़ौम को गिराता है।
(अद-दारिमी, हदीस नंबर: 3365)
यह उसूल (अस्ल) मुस्लिम उम्मत की शुरुआती तारीख़ (इतिहास) में पूरी तरह एक हक़ीक़त बनकर सामने आ चुका है। इतिहासकारों ने आम तौर पर इस सच्चाई को माना है।
मिसाल के तौर पर प्रोफ़ेसर फ़िलिप हिट्टी (मृत्यु:1978) ने अपनी किताब "द हिस्ट्री ऑफ द अरब्स" में तेरहवीं सदी ईस्वी में तातारी क़बीलों (Mongol tribes) के इस्लाम क़ुबूल करने का ज़िक्र करते हुए लिखा है:
मुसलमानों के मज़हब ने वहाँ फ़तह हासिल कर ली, जहाँ उनकी तलवार नाकाम हो चुकी थी।
The religion of Muslims has conquered, where their arms had failed.
क़ुरआन एक आइडियोलॉजी की किताब (book of ideology) है। इसके मुक़ाबले में तलवार भौतिक ताक़त (material power) की निशानी है। और यह एक हक़ीक़त है कि तलवार के मुक़ाबले में क़ुरआन ज़्यादा ताक़तवर है।
तलवार की जीत
हारने वाले के ख़ातमे क़ीमत पर होती है, लेकिन क़ुरआन आदमी के दिल-ओ-दिमाग़
को जीतकर उसे
आपका साथी बना देता है।
तलवार की जीत
सिर्फ़ जंग के मैदान तक सीमित रहती है, जबकि क़ुरआन की फ़तह इंसान के अंदर होती है — और जब
इंसान ही फ़तह हो जाए, तो समझो सब कुछ फ़तह हो गया।
क़ुरआन, अल्लाह का महफूज़ हिदायतनामा (protected book of guidance) है। क़ुरआन सीधे तौर पर इंसान की फ़ितरत (अंदरूनी प्रकृति) को एड्रेस करता है। क़ुरआन आदमी की तलाश का जवाब है। क़ुरआन आदमी को दुनिया और आख़िरत (परलोक) की कामयाबी का राज़ बताता है।
इतना ही नहीं, क़ुरआन सिर्फ़ एक नज़रियाती (ideological) किताब ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऐतिहासिक घटनाओं की सच्चाई भी मौजूद है जो इसकी तालीम के असरदार होने और इसके जीतने की ताक़त की गवाही देती है।
क़ुरआन
नज़रिया (आइडियोलॉजी) भी है और इतिहास भी। इन्हीं बातों ने क़ुरआन को हमेशा
के लिए एक ऐसी किताब बना दिया है जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता।
जो लोग क़ुरआन की दावत को लेकर उठें, उनके लिए किसी और ताक़त की ज़रूरत नहीं। क़ुरआन अपने आप में उनकी तमाम दावती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी है।
क़ुरआन इंसान के दिल को जीतने वाली किताब भी है और
पूरी दुनिया को जीतने वाली किताब भी।
इसी लिए क़ुरआन फ़ातेह-ए-इंसान (इंसान को जीतने वाला) भी है और फ़ातेह-ए-आलम (दुनिया को जीतने वाला) भी।
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